रैगरों में अधोगामी सोच क्यों? भाग -1

श्री रूपचन्द जी जलूथरियाजी ने बिना किसी ऐतिहासिक शोध के ही, हर उस रैगर के लताड़ लगाई, जिसने रैगरों को सूर्यवंशी, सगरवंशी या रघुवंशी कहा था। श्री जलूथरियाजी की सोच कैसी भी थी, उन जैसे विद्वान को अधोगामी सोच से इस लेख को पूरा पढ़ने के लिए यहाँ टच/क्लिक करे…….

रंगड़ व रैगर वंशशब्द रघु के अपभ्रंश रग के ध्वनि रूपान्तरण है

जातिनाम के मनमाने हिज्जों से उसकी व्युत्पत्ति गढ़ना:- ‘रग’ एक प्राचीन राजवंश है। कर्नल टाड ने भी रग क्षत्रियों को रघुवंश की एक शाखा बताया है। इस वंश के लोग चहुं ओर फ़ेल गए थे