रैगरों के गोत्रशब्दों के प्रथम शब्दांश बलसूचक शब्द पुरुषों के नाम हैं

सम्मानीय रैगर भाइयो,
जिस प्रकार से अग्रवाल गोत्रनाम विशिष्ट शब्द हैं, उसी प्रकार रैगर गोत्रवंश शब्द प्रारूप भी विशिष्ट है। स्पष्टतः रैगरों के गोत्रवंश शब्दों के प्रथम शब्दांश, उन महापुरुषों के नाम या नामांश हैं, जिनके नाम पर रैगर गोत्रनाम चले हैं। लेकिन विशेष बात यह है कि ये शब्दांश बलसूचक शब्द भी हैं। जबकि प्राचीनकाल में बलसूचक शब्दों से तो क्षत्रिय पुरुषों के नामकरण किये जाने की प्रथा थी। इस बात का उल्लेख मनुस्मृति के निम्नांकित श्लोक में भी है:-
मांगल्यं ब्राह्मणस्य स्यात क्षत्रियस्य बलान्वितम् ।
वैश्यस्य धन संयुक्त शूद्रस्तु जुगुप्नि सितम् ।।
अर्थात् ब्राह्मण का नाम मंगलसूचक, क्षत्रिय का नाम बलसूचक, वैश्य का धनसूचक तथा शूद्र का घृणासूचक शब्द होना चाहिये।
रैगर भाइयो !
यदि आप मनु को अन्य किसी संदर्भ में गलत समझते हैं तो वह आपका विचार है। लेकिन उक्त श्लोक के तथ्य आपके पूर्वजों को क्षत्रिय प्रमाणित करते है। क्योंकि रैगर गोत्र भोजपुरिया, बिजैपुरिया, उदैपुरिया, कानपुरिया, मोहनपुरिया, मोलपुरिया, मोसलपुरिया, धौलपुरिया, समंदपुरिया, जबरपुरिया, डूंगरपुरिया, उजीरपुरिया, भौपरिया, गौपरिया, फौपरिया, कनवाड़िया, धनवाड़िया, सनवाड़िया, डाडवाड़िया, पूनखेड़िया, मदनकोटिया, मण्डरावलिया, खटनावलिया, बागोरिया, रागोरिया, गोगोरिया, धामकदडिया, खुमाणिया, गुमाणिया, टुमाणिया, जाबड़जाटिया, मान्दोरिया, आन्दोरिया, सालोदिया, आलोदिया, बालोदिया, खमोखरिया आदि के प्रथम शब्दांश क्रमशः भोजजी, बिजैजी, उदैजी, कानजी, मोहनजी, मोलजी, मोसलजी, धौलजी, समंदजी, जबरजी, डूंगरजी, उजीरजी, भौपजी, गौपजी, फौपजी, कनजी, धनजी, सनजी, डाडजी, पूनजी, मदनजी, मण्डजी, खटजी, बागोजी, रागोजी, गोगोजी, धामकजी, खुमाणजी, गुमाणजी, टुमाणजी, जाबड़जी, मानजी, आनजी, सालजी, आलजी, बालजी, खम्बजी नामक क्षत्रिय पुरुषों के नाम है, जिनका जन्म पूरिया, परिया, वाड़िया, खैड़िया, कौटिया, वालियावंश के उपवंश रावलिया, वालियावंश के उपवंश नावलिया, गौरिया, दडिया, माणिया, जाटिया, दौरिया, लौदिया, मौखरिया आदि क्षत्रियवंशों में हुआ था।
यह कोई कपोल कल्पित नहीं है। अपितु किसी क्षत्रियवंश में जन्में महापुरुष के नाम से उपवंश नाम चलने की पुष्टि तोAn inquiry into the ethnography of Afghanistan, prepared and presented to the Ninth International Congress of Orientalists (1891) by Henry Walter Bellewpp. 92 पर अफगानी खांपशब्द अखोर की बतायी गयी इस व्युत्पत्ति से भी होती है:-
Akhor or Akor means the house or family of A; they are sometimes called A-khel (Sons of A, who born in the Khor clan).
अर्थात्अखोरखांपकेलोगउसमहापुरुषकेवंशजहै, जिसकाजन्मखोरवंशमेंहुआथातथाउसकेनामकाप्रथमअक्षरअ (जैसेकिअखजीयाअकजीकाअ) था।
रैगर भाइयो!
आपको ऐसे अनेक भाई मिल जायेंगे, जो उनके तुच्छ फायदे के लिए रैगर समुदाय तथा उसमें जन्में स्वामी आत्मारामजी लक्ष्य, स्वामी केवलानंदजी महाराज, स्वामी ज्ञानस्वरूपजी महाराज जैसों महापुरुषों के खिलाफ कुछ भी बोल सकते हैं। लेकिन आप पढ़े लिखे हैं। अतः आप सोच सकते हैं कि यदि इतिहास का महत्व नहीं होता तो हमारी सरकार इतिहास की खोज पर करोड़ों रुपया खर्च नही करती और केवल जाट जाति के इतिहास पर सैकड़ों ग्रन्थ नहीं लिखे जाते। अतः हम सब की भी यह सोच हो कि प्राचीन रैगर इतिहास भी लिखा जाना चाहिये।
-C.L.Verma R.A.S. rtd

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